Popular:
अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 19 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 19 • मन्त्र 3

5.19.3

Mantra ID: 5.19.3

ये ब्रा॑ह्म॒णं प्र॒त्यष्ठी॑व॒न्ये वा॑स्मिञ्छु॒ल्कमी॑षि॒रे । अ॒स्नस्ते॒ मध्ये॑ कु॒ल्यायाः॒ केशा॒न्खाद॑न्त आसते ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 5.19.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन्होंने ब्राह्मणों पर थूका और जिन्होंने ब्राह्मणों से धन लेने की इच्छा की, वे रक्त की सरिता में पड़े हैं और बालों को खा रहे हैं. (३)

EN English Translation

Those who spat on Brahmins and those who wished to take money from Brahmins are lying in a stream of blood and eating hair. (3)

卐 HinduText AI