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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 23 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 23 • मन्त्र 3

5.23.3

Mantra ID: 5.23.3

यो अ॒क्ष्यौ॑ परि॒सर्प॑ति॒ यो नासे॑ परि॒सर्प॑ति । द॒तां यो मद्यं॒ गच्छ॑ति॒ तं क्रिमिं॑ जम्भयामसि ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.23.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो कृमि आंखों में घूमते हैं जो नाखूनों में चलतेफिरते हैं तथा जो दांतों के मध्य निवास करते हैं, उन कृमियों को हम नष्ट करते हैं. (३)

EN English Translation

We destroy the worms that move in the eyes, which move in the nails and those who live between the teeth. (3)

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