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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 23 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 23 • मन्त्र 2

5.23.2

Mantra ID: 5.23.2

अ॒स्येन्द्र॑ कुमा॒रस्य॒ क्रिमी॑न्धनपते जहि । ह॒ता विश्वा॒ अरा॑तय उ॒ग्रेण॒ वच॑सा॒ मम॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.23.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धन के स्वामी इंद्र! इस बालक के शत्रु रूप कृमियों का विनाश करो. इन्हें मेरे उग्र वचनों के साथ पूरी तरह नष्ट करो. (२)

EN English Translation

O Swami of Wealth Indra! Destroy the enemy form of this child, the worms. Destroy them completely with My fiery words. (2)

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