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5.23.9
त्रि॑शी॒र्षाणं॑ त्रिक॒कुदं॒ क्रिमिं॑ सा॒रङ्ग॒मर्जु॑नम् । शृ॒णाम्य॑स्य पृ॒ष्टीरपि॑ वृश्चामि॒ यच्छिरः॑ ॥ (९)
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अथर्ववेद मन्त्र 5.23.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मैं तीन सिरों वाले, तीन ककुदों वाले, चितकबरे रंग वाले और श्वैत वर्ण वाले कृमियों को मंत्र की शक्ति से नष्ट करता हुआ, उन की पसलियों और सिरों को कुचलता हूं. (९)
EN English Translation
I crush the ribs and ends of three-headed, three-shaped, mottled and white-colored worms with the power of the mantra. (9)