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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 28 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 28 • मन्त्र 9

5.28.9

Mantra ID: 5.28.9

दि॒वस्त्वा॑ पातु॒ हरि॑तं॒ मध्या॑त्त्वा पा॒त्वर्जु॑नम् । भूम्या॑ अय॒स्मयं॑ पातु॒ प्रागा॑द्देवपु॒रा अ॒यम् ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.28.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

आकाश स्वर्ण के द्वारा तेरी रक्षा करे. मध्य लोक से रजत तेरी रक्षा करे. पृथ्वीलोक तेरी रक्षा करे. ये तीनों देव नगरियों को प्राप्त होते हैं. (९)

EN English Translation

May the sky protect you with gold. May silver protect you from the middle world. May the earth protect you. These three gods are received by the cities. (9)

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