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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 31 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 31 • मन्त्र 2

5.31.2

Mantra ID: 5.31.2

यां ते॑ च॒क्रुः कृ॑क॒वाका॑व॒जे वा॒ यां कु॑री॒रिणि॑ । अव्यां॑ ते कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.31.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे मुरगे अथवा बकरे के मांस में अथवा पेड़ पर स्थित किया है. मैं तुझे उसी की ओर लौटाता हूं, जिस ने तुझे अभिचार कर के भेजा है. (२)

EN English Translation

O act! The agent has placed you in the flesh of a chicken or a goat or on a tree. I return you to him who sent you. (2)

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