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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 31 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 31 • मन्त्र 4

5.31.4

Mantra ID: 5.31.4

यां ते॑ च॒क्रुर॑मू॒लायां॑ वल॒गं वा॑ नरा॒च्याम् । क्षेत्रे॑ ते कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.31.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे मनुष्यों द्वारा पूजित खाने के पदार्थ में ढक कर खेत में स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (४)

EN English Translation

O act! The Agent has covered you in food items worshipped by humans and placed you in the field. We return you to him who sent you. (4)

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