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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 142 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 142 • मन्त्र 3

6.142.3

Mantra ID: 6.142.3

अक्षि॑तास्त उप॒सदोऽक्षि॑ताः सन्तु रा॒शयः॑ । पृ॒णन्तो॒ अक्षि॑ताः सन्त्व॒त्तारः॑ स॒न्त्वक्षि॑ताः ॥ (३)

ॐ

शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 6.142.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

॥ वैदिक संदर्भ ॥

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जौ! तुझ से संबंधित कर्म करने वाले विनाश रहित हों. तेरे ढेर नाश रहित हों. तुझे घर में रखने को ले जाने वाले लोग विनाश रहित हों. तुझे खाने वाले लोग भी विनाश रहित हों. (३)

EN English Translation

O barley! Those who do things related to you should be without destruction. May your heaps be without destruction. Let the people who take you to the house be without destruction. May those who eat you also be without destruction. (3)

शास्त्र जिज्ञासा
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