Popular:
अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 34 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 34 • मन्त्र 5

6.34.5

Mantra ID: 6.34.5

यो अ॒स्य पा॒रे रज॑सः शु॒क्रो अ॒ग्निरजा॑यत । स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑ ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 6.34.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस भूलोक के ऊपर जो अंतरिक्ष है, उस में जो निर्मल सूर्य रूपी अग्नि उत्पन्न हुई थी, वह हमें शत्रुओं से बचाए. (५)

EN English Translation

The agni of the pure sun that was created in the space above this earth, save us from the enemies. (5)

卐 HinduText AI