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6.70.2
यथा॑ ह॒स्ती ह॑स्ति॒न्याः प॒देन॑ प॒दमु॑द्यु॒जे । यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ । ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम् ॥ (२)
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अथर्ववेद मन्त्र 6.70.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हाथी जिस प्रकार अपने पैर से प्रेम के साथ हथिनी का पैर मोड़ता है तथा जिस प्रकार सुरत के इच्छुक पुरुष का मन स्त्री में लगा रहता है, हे गौ! उसी प्रकार तेरा मन तेरे बछड़े में लगा रहे. (२)
EN English Translation
The way the elephant folds the elephant's leg with love with its foot and the way the mind of the man willing to surat is engaged in the woman, O cow! In the same way, let your mind be in your calf. (2)