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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 76 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 76 • मन्त्र 1

6.76.1

Mantra ID: 6.76.1

य ए॑नं परि॒षीद॑न्ति समा॒दध॑ति॒ चक्ष॑से । सं॒प्रेद्धो॑ अ॒ग्निर्जि॒ह्वाभि॒रुदे॑तु॒ हृद॑या॒दधि॑ ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.76.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो राक्षस आदि इस के चारों ओर बैठते हैं तथा हिंसा करने के लिए तत्पर हो जाते हैं, उन के हृदय से उत्पन्न प्रज्चलित अग्नि उन्हें जला दे. (१)

EN English Translation

May the agni produced by the hearts of the demons etc. who sit around it and become ready to commit violence burn them. (1)

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