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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 76 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 76 • मन्त्र 2

6.76.2

Mantra ID: 6.76.2

अ॒ग्नेः सां॑तप॒नस्या॒हमायु॑षे प॒दमा र॑भे । अ॑द्धा॒तिर्यस्य॒ पश्य॑ति धू॒ममु॒द्यन्त॑मास्य॒तः ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.76.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अधिक तपन वाले उन अग्नि देव के जीवन के लिए मैं उपक्रम करता हूं, जिन के मुख से निकलते हुए धूम को अद्धाति नाम के ऋषि देखते हैं. (२)

EN English Translation

I undertake for the life of the agni god with more heat, from whose mouth the sage named Adhati sees the smoke. (2)

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