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6.80.3
अ॒प्सु ते॒ जन्म॑ दि॒वि ते॑ स॒धस्थं॑ समु॒द्रे अ॒न्तर्म॑हि॒मा ते॑ पृथि॒व्याम् । शुनो॑ दि॒व्यस्य॒ यन्मह॒स्तेना॑ ते ह॒विषा॑ विधेम ॥ (३)
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अथर्ववेद मन्त्र 6.80.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि, वाडवाग्नि के रूप में तुम्हारा जन्म सागर में हुआ था तथा सूर्य के रूप में तुम्हारी स्थिति आकाश में रही है. सागर और धरती के मध्य तुम्हारी महिमा देखी जाती है. हे अग्नि! हम हवि के द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. (३)
EN English Translation
O Agni, you were born in the ocean as Wadvagni and your position as sun has been in the sky. Your glory is seen between the ocean and the earth. O agni! We serve you through Havi. (3)