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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 13 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 13 • मन्त्र 2

7.13.2

Mantra ID: 7.13.2

वि॒द्म ते॑ सभे॒ नाम॑ न॒रिष्टा॒ नाम॒ वा अ॑सि । ये ते॒ के च॑ सभा॒सद॑स्ते मे सन्तु॒ सवा॑चसः ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.13.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सभा! मैं तेरे नामों को जानता हूं. तेरा नाम नरिष्टा अर्थात्‌ दूसरों के द्वारा अभिभूत न होने वाली है. तुझ से संबंधित जो सभासद हैं, वे सब मेरे समान वचन वाले अर्थात्‌ मेरा अनुमोदन करने वाले हों. (२)

EN English Translation

O gathering! I know your names. Your name is not going to be overwhelmed by others. All the members who belong to you should be those who speak like Me, that is, to approve of Me. (2)

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