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अथर्ववेद

Kanda 7 • Sukta 27 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 7 • सूक्त 27 • मन्त्र 1

7.27.1

Mantra ID: 7.27.1

विष्णो॒र्नु कं॒ प्रा वो॑चं वी॒र्याणि॒ यः पार्थि॑वानि विम॒मे रजां॑सि । यो अस्क॑भाय॒दुत्त॑रं स॒धस्थं॑ विचक्रमा॒णस्त्रे॒धोरु॑गा॒यः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 7.27.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं उन विष्णु के किन वीरतापूर्ण कर्मो का वर्णन करूं, जिन्होंने पृथ्वी के रूप में लोकों का निर्माण किया है. विष्णु ने इस से भी ऊंचे स्तर के स्थान स्वर्ग को धारण किया है. महापुरुषों द्वारा स्तुति किए गए विष्णु ने पृथ्वी, अंतरिक्ष और आकाश में चरण रखते हुए यह निर्माण किया है. (१)

EN English Translation

What heroic deeds should I describe of Vishnu, who has created the worlds in the form of earth? Vishnu has taken heaven, a place of a higher level than this. Vishnu, praised by great men, has created this by keeping feet in the earth, space and sky. (1)

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