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अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 10 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 10 • मन्त्र 16

8.10.16

Mantra ID: 8.10.16

तद्वि॒षं स॒र्पा उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१६)

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अथर्ववेद मन्त्र 8.10.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उस विष के सहारे सर्प जीवित रहते हैं. जो इस बात को जानता है, वह सब को जीवन का सहारा देने वाला बनता है. (१६)

EN English Translation

Snakes survive with the help of that poison. He who knows this becomes the one who supports everyone with life. (16)

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