Popular:
अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 2 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 2 • मन्त्र 11

8.2.11

Mantra ID: 8.2.11

कृ॒णोमि॑ ते प्राणापा॒नौ ज॒रां मृ॒त्युं दी॒र्घमायुः॑ स्व॒स्ति । वै॑वस्व॒तेन॒ प्रहि॑तान्यमदू॒तांश्च॑र॒तोऽप॑ सेधामि॒ सर्वा॑न् ॥ (११)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 8.2.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे आयु को चाहने वाले पुरुष! मैं तेरे शरीर में प्राण और अपान वायु को स्थिर करता हूं. मैं ऐसा उपाय करता हूं, जिस से बुढ़ापा और मृत्यु तुझे न छू सकें. मैं तेरी आयु का विस्तार कर के तेरा कल्याण करता हूं तथा यमराज के द्वारा भेजे हुए एवं सभी जगह घूमते हुए यमदूतों को तुझ से दूर करता हूं. (११)

EN English Translation

O man who wants age! I stabilize the life and my air in your body. I take such measures that old age and death cannot touch you. I extend your life and do your welfare and remove the Yamdoots sent by Yamraj and roaming everywhere from you. (11)

卐 HinduText AI