Popular:
अथर्ववेद

Kanda 8 • Sukta 7 • Mantra 22

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 8 • सूक्त 7 • मन्त्र 22

8.7.22

Mantra ID: 8.7.22

तस्या॒मृत॑स्ये॒मं बलं॒ पुरु॑षं पाययामसि । अथो॑ कृणोमि भेष॒जं यथास॑च्छ॒तहा॑यनः ॥ (२२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 8.7.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जड़ीबूटियों के अमृत रूपी बल को मैं रोगी पुरुष को पिलाता हूं. मैं इस की चिकित्सा इस प्रकार करता हूं कि यह रोगी पुरुष सौ वर्ष की अवस्था प्राप्त करे. (२२)

EN English Translation

I feed the nectar-like force of herbs to the patient man. I treat it in such a way that this patient man attains the age of 100 years. (22)

卐 HinduText AI