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9.1.12
यथा॒ सोमो॑ द्वि॒तीये॒ सव॑न इन्द्रा॒ग्न्योर्भ॑वति प्रि॒यः । ए॒वा म॑ इन्द्राग्नी॒ वर्च॑ आ॒त्मनि॑ ध्रियताम् ॥ (१२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 9.1.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस प्रकार सोमरस तीसरे सवन में इंद्र और अग्नि को प्रिय होता है, उसी प्रकार इंद्र और अग्नि मुझ में तेज की स्थापना करें. (१२)
EN English Translation
Just as Someras is dear to Indra and Agni in the third sawan, so may Indra and Agni establish radiance in me. (12)