Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 1 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 1 • मन्त्र 13

9.1.13

Mantra ID: 9.1.13

यथा॒ सोम॑स्तृ॒तीये॒ सव॑न ऋभू॒णां भ॑वति प्रि॒यः । ए॒वा म॑ ऋभवो॒ वर्च॑ आ॒त्मनि॑ ध्रियताम् ॥ (१३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.1.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार सोमरस तीसरे सवन में शत्रुओं को प्रिय होता है, उसी प्रकार ऋभुगण मुझ में तेज धारण करें. (१३)

EN English Translation

Just as Someras is dear to enemies in the third sawan, so let the swamis wear glory in me. (13)

卐 HinduText AI