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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 11 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 11 • मन्त्र 8

9.11.8

Mantra ID: 9.11.8

स उप॑हूतो॒ऽन्तरि॑क्षे भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न्यद॒न्तरि॑क्षे वि॒श्वरू॑पम् ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.11.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वह बुलाने पर स्वर्ग में भोजन करता है. अंतरिक्ष में जो विश्वरूप है, वह उस के यहां बुलाया जाता है. (८)

EN English Translation

He eats in heaven when called. The world form in space is called to him. (8)

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