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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 12 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 12 • मन्त्र 1

9.12.1

Mantra ID: 9.12.1

प्र॒जाप॑तिश्च परमे॒ष्ठी च॒ शृङ्गे॒ इन्द्रः॒ शिरो॑ अ॒ग्निर्ल॒लाटं॑ य॒मः कृका॑टम् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.12.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस गाय के दोनों सींग प्रजापति और परमेष्ठी हैं. इंद्र ही इस का सिर, अग्नि ललाट और यम कृकाट अर्थात्‌ गले के नीचे लटकता हुआ भाग है. (१)

EN English Translation

Both the horns of this cow are Prajapati and Parmeshti. Indra is the head of this, agni frontal and Yama Krikat i.e. the hanging part under the neck. (1)

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