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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 13 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 13 • मन्त्र 15

9.13.15

Mantra ID: 9.13.15

याः पा॒र्श्वे उ॑प॒र्षन्त्य॑नु॒निक्ष॑न्ति पृ॒ष्टीः । अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म् ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.13.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो अस्थियां दोनों पसलियों की ओर जाती हैं तथा पीठ वाले भाग को सशक्त बनाती हैं, वे रोगरहित रहती हुई तुम्हारे शरीर का त्याग न करें. (१५)

EN English Translation

The bones that go towards both ribs and strengthen the back part, do not leave your body while remaining diseaseless. (15)

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