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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 1

9.14.1

Mantra ID: 9.14.1

अ॒स्य वा॒मस्य॑ पलि॒तस्य॒ होतु॒स्तस्य॒ भ्राता॑ मध्य॒मो अ॒स्त्यश्नः॑ । तृ॒तीयो॒ भ्राता॑ घृ॒तपृ॑ष्ठो अ॒स्यात्रा॑पश्यं वि॒श्पतिं॑ स॒प्तपु॑त्रम् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

आह्वान करने योग्य सूर्य स्तुति कर्ता का पालन करते हैं. उन सूर्य के मध्यम भ्राता वायु देव हैं जो आकाश में जल ले जाते हैं. इन सूर्य देव के तीसरे भ्राता अग्नि हैं. इस प्रकार मैं सूर्य को ही प्रमुख एवं आश्चर्यजनक समझता हूं. (१)

EN English Translation

Invoke the Sun follows the praiser. The middle brother of those suns is the air god who carries water in the sky. Agni is the third brother of sun god. In this way, I consider the sun to be the main and surprising. (1)

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