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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 17

9.14.17

Mantra ID: 9.14.17

अ॒वः परे॑ण प॒र ए॒नाव॑रेण प॒दा व॒त्सं बिभ्र॑ती॒ गौरुद॑स्थात् । सा क॒द्रीची॒ कं स्वि॒दर्धं॒ परा॑गा॒त्क्व स्वित्सूते न॒हि यू॒थे अ॒स्मिन् ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धवल वर्ण की गौ अगले पैर से अन्न को तथा पिछले पैर से अपने बछड़े को धारण करती हुई उड़ती है. वह किसी आधे भाग में गई थी. वह इस झुंड में बच्चा नहीं देती. (१७)

EN English Translation

The cow of dhaval varna flies with the next foot holding the food and the back foot holding its calf. She went to one half. She does not give a child in this herd. (17)

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