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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 1

9.15.1

Mantra ID: 9.15.1

यद्गा॑य॒त्रे अधि॑ गाय॒त्रमाहि॑तं॒ त्रैष्टु॑भं वा॒ त्रैष्टु॑भान्नि॒रत॑क्षत । यद्वा॒ जग॒ज्जग॒त्याहि॑तं प॒दं य इत्तद्वि॒दुस्ते अ॑मृत॒त्वमा॑नशुः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गायत्र में गायत्र छिपा हुआ है और त्रैष्टुभम् में त्रैष्टुभ व्याप्त है. जो लोग जगती में छिपे हुए जगत्‌ को जानते हैं, वे अमृत का उपभोग करते हैं. (१)

EN English Translation

Gayatra is hidden in Gayatra and Traishtubh is pervaded in Traishtubham. Those who know the world hidden in the world, they attain eternity. (1)

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