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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 10

9.15.10

Mantra ID: 9.15.10

य ईं॑ च॒कार॒ न सो अ॒स्य वे॑द॒ य ईं॑ द॒दर्श॒ हिरु॒गिन्नु तस्मा॑त् । स मा॒तुर्योना॒ परि॑वीतो अ॒न्तर्ब॑हुप्र॒जा निरृ॑ति॒रा वि॑वेश ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस ने इस की रचना की है, वह इस के गर्भ को नहीं देखता. जो इस के गर्भ में जाता है, वही इस को देखता है. माता की योनि से उत्पन्न बालक अनेक बार जन्ममरण रूपी पाप देवता निर्त्ऋति के जाल में फंसता है. (१०)

EN English Translation

He who created it does not see its womb. He who goes into his womb sees it. The child born from the mother's vagina is many times trapped in the trap of the sin god of birth. (10)

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