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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 16

9.15.16

Mantra ID: 9.15.16

अपा॒ङ्प्राङे॑ति स्व॒धया॑ गृभी॒तोऽम॑र्त्यो॒ मर्त्ये॑ना॒ सयो॑निः । ता शश्व॑न्ता विषू॒चीना॑ वि॒यन्ता॒ न्यन्यं चि॒क्युर्न नि चि॑क्युर॒न्यम् ॥ (१६)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मरणधर्मिता से रहित अर्थात्‌ अमर आत्मा मरणधर्मा मन के साथ गर्भ से प्रकट होती है. इन में से आत्मा ब्रह्म में मिल कर तदाकार हो जाती है. (१६)

EN English Translation

The immortal soul, that is, without death, appears from the womb with the mind of death. Out of these, the soul merges with Brahman and becomes a tadakar. (16)

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