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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 25

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 25

9.15.25

Mantra ID: 9.15.25

श॑क॒मयं॑ धू॒ममा॒राद॑पश्यं विषू॒वता॑ प॒र ए॒नाव॑रेण । उ॒क्षाणं॒ पृश्नि॑मपचन्त वी॒रास्तानि॒ धर्मा॑णि प्रथ॒मान्या॑सन् ॥ (२५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं ने विषुवत एवं ऐनावर यज्ञ के द्वारा सर्वत्र व्याप्त धूम को समीप से देखा. वीरों ने शक्ति देने वाले सोमरस को पकाया. वे ही प्रमुख धर्म थे. (२५)

EN English Translation

I saw from close quarters the smoke spread everywhere through the Equinox and The Enavar Yagya. The heroes cooked the power-giving someras. They were the main dharmas. (25)

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