Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 3

9.15.3

Mantra ID: 9.15.3

जग॑ता॒ सिन्धुं॑ दि॒व्यस्कभायद्रथंत॒रे सूर्यं॒ पर्य॑पश्यत् । गा॑य॒त्रस्य॑ स॒मिध॑स्ति॒स्र आ॑हु॒स्ततो॑ म॒ह्ना प्र रि॑रिचे महि॒त्वा ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.15.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

संसार के द्वारा सिंधु को द्विलोक की ओर प्रेरित किया गया. ज्ञानियों ने रथंतर में सूर्य का दर्शन किया. उन्होंने गायत्र यज्ञ की तीन समिधाएं बताई. इस के पश्चात वे अपनी महत्ता से ही वृद्धि को प्राप्त हुए. (३)

EN English Translation

Sindhu was inspired by the world towards Dwilaoka. The wise saw the sun in Rathantar. He told three samidhas of Gayatri Yagya. After this, he got growth from his importance. (3)

卐 HinduText AI