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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 2 • Mantra 25

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 2 • मन्त्र 25

9.2.25

Mantra ID: 9.2.25

यास्ते॑ शि॒वास्त॒न्वः काम भ॒द्रा याभिः॑ स॒त्यं भव॑ति॒ यद्वृ॑णी॒षे । ताभि॒ष्ट्वम॒स्माँ अ॑भि॒संवि॑शस्वा॒न्यत्र॑ पा॒पीरप॑ वेशया॒ धियः॑ ॥ (२५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.2.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कामदेव! तुम्हारे जो कल्याणकारी एवं भद्र शरीर हैं, उन के द्वारा तुम जिन का वरण करते हो, वही सत्य है. उन्हीं के द्वारा तुम हमारे शरीरों में प्रवेश करो. तुम अपनी पापबुद्धियों को हम से दूर रखो तथा उन्हें शत्रुओं में प्रविष्ट करो. (२५)

EN English Translation

O Cupid! What you choose through your welfare and gentle bodies is the truth. Through them you enter our bodies. Keep your sinners away from us and enter them into enemies. (25)

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