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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 2 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 2 • मन्त्र 8

9.2.8

Mantra ID: 9.2.8

इ॒दमाज्यं॑ घृ॒तव॑ज्जुषा॒णाः काम॑ज्येष्ठा इ॒ह मा॑दयध्वम् । कृ॒ण्वन्तो॒ मह्य॑मसप॒त्नमे॒व ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कामदेव को अपने से बड़ा मानने वाले देवो! मेरे घृत वाले आज्य का सेवन करते हुए तुम सुखी रहो. (८)

EN English Translation

O God who considers Cupid to be greater than you! May you be happy while consuming my disgusting ajya. (8)

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