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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 3 • Mantra 18

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 3 • मन्त्र 18

9.3.18

Mantra ID: 9.3.18

इट॑स्य ते॒ वि चृ॑ता॒म्यपि॑नद्धमपोर्णु॒वन् । वरु॑णेन॒ समु॑ब्जितां मि॒त्रः प्रा॒तर्व्युब्जतु ॥ (१८)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.3.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शाला! मैं व्यतीत हुए संवत्सर के समान तेरे बंधनों को खोल कर अलग करता हूं. तुझे वरुण ने खोला है, आदित्य तेरा उदघाटन करते हैं. (१८)

EN English Translation

O school! I open and separate your bonds like the samvatsar that has passed. Varun has opened you, Aditya inaugurates you. (18)

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