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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 3 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 3 • मन्त्र 2

9.3.2

Mantra ID: 9.3.2

यत्ते॑ न॒द्धं वि॑श्ववारे॒ पाशो॑ ग्र॒न्थिश्च॒ यः कृ॒तः । बृह॒स्पति॑रिवा॒हं ब॒लं वा॒चा वि स्रं॑सयामि॒ तत् ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.3.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वरण करने योग्य शाला! तुझ में जो बंधन है, जो पाश है और जो गाठे हैं, उन्हें बृहस्पति के समान शक्तिशाली मैं अपने मंत्र बल से खोलता हूं. (२)

EN English Translation

O selectable school! The bondage in you, the loop and the ones that are knots, I open them as powerful as Jupiter with my mantra force. (2)

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