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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 3 • Mantra 22

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 3 • मन्त्र 22

9.3.22

Mantra ID: 9.3.22

प्र॒तीचीं॑ त्वा प्रती॒चीनः॒ शाले॒ प्रैम्यहिं॑सतीम् । अ॒ग्निर्ह्यन्तराप॑श्च॒र्तस्य॑ प्रथ॒मा द्वाः ॥ (२२)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.3.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शाला! मैं हिंसा रहित हो कर तुझ में प्रवेश करता हूं. तेरा मुख यदि पश्चिम की ओर है तो मैं पूर्वाभिमुख हो कर तुझ में प्रवेश करता हूं. ब्रह्म से उत्पन्न होने वाले अग्नि और जल भी मेरे साथ तुझ में प्रवेश करते हैं. (२२)

EN English Translation

O school! I enter you without violence. If you are facing west, I will face east and enter you. Agni and water originating from Brahman also enter you with me. (22)

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