Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 4 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 4 • मन्त्र 15

9.4.15

Mantra ID: 9.4.15

क्रो॒ड आ॑सीज्जामिशं॒सस्य॒ सोम॑स्य॒ क॒लशो॑ धृ॒तः । दे॒वाः सं॒गत्य॒ यत्सर्व॑ ऋष॒भं व्यक॑ल्पयन् ॥ (१५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.4.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बैल की गुदा सिनीवाली का भाग थी तथा धारण किया गया कलश सोम का भाग था. सभी देवों ने एकत्र हो कर इस प्रकार बैल की कल्पना की थी. (१५)

EN English Translation

The bull's anus was part of Siniwali and the kalash held was part of Som. All the gods gathered and imagined the bull in this way. (15)

卐 HinduText AI