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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 4 • Mantra 18

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 4 • मन्त्र 18

9.4.18

Mantra ID: 9.4.18

श॑त॒याजं॒ स य॑जते॒ नैनं॑ दुन्वन्त्य॒ग्नयः॑ । जिन्व॑न्ति॒ विश्वे॒ तं दे॒वा यो ब्रा॑ह्म॒ण ऋ॑ष॒भमा॑जु॒होति॑ ॥ (१८)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.4.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो ब्राह्मण बैल का दान करता है, वह शतयाज नामक यज्ञ करने का पुण्य प्राप्त करता है. उसे अग्नि देव संताप नहीं देते और सभी देव उसे संतुष्ट करते हैं. (१८)

EN English Translation

The Brahmin who donates the bull gets the virtue of performing a yajna called Shatayaj. Agni Dev does not give him anger and all the gods satisfy him. (18)

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