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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 5 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 5 • मन्त्र 3

9.5.3

Mantra ID: 9.5.3

प्र प॒दोऽव॑ नेनिग्धि॒ दुश्च॑रितं॒ यच्च॒चार॑ शु॒द्धैः श॒फैरा क्र॑मतां प्रजा॒नन् । ती॒र्त्वा तमां॑सि बहु॒धा वि॒पश्य॑न्न॒जो नाक॒मा क्र॑मतां तृ॒तीय॑म् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.5.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पाप कर्म करने वाले अज! तू अपने पैरों को पवित्र कर एवं जानता हुआ अपने खुरों से स्वर्ग में आरोहण कर. यह अज अनेक प्रकार के अंधकारों को पार करता हुआ तृतीय स्वर्ग में पहुंचे. (३)

EN English Translation

O one who commits sin! Sanctify your feet and ascend to heaven with your hooves, knowing. This aj reached the third heaven, crossing many types of darkness. (3)

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