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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 5 • Mantra 30

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 5 • मन्त्र 30

9.5.30

Mantra ID: 9.5.30

आ॒त्मानं॑ पि॒तरं॑ पु॒त्रं पौत्रं॑ पिताम॒हम् । जा॒यां जनि॑त्रीं मा॒तरं॒ ये प्रि॒यास्तानुप॑ ह्वये ॥ (३०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.5.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं अपनेआप को, पिता को, पुत्र को, पौत्र को, बाबा को, पत्नी तथा जन्म देने वाली माता को एवं समस्त प्रियजनों को बुलाता हूं. (३०)

EN English Translation

I call myself, father, son, grandson, baba, wife and mother who gave birth and all loved ones. (30)

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