Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 7 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 7 • मन्त्र 13

9.7.13

Mantra ID: 9.7.13

योऽति॑थीनां॒ स आ॑हव॒नीयो॒ यो वेश्म॑नि॒ स गार्ह॑पत्यो॒ यस्मि॒न्पच॑न्ति॒ स द॑क्षिणा॒ग्निः ॥ (१३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.7.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अतिथियों को बुलाना आहवनीय अग्नि है, अपने घर में उन्हें भोजन कराना गार्हपत्य अग्नि है और जिस पात्र में अतिथि के लिए भोजन पकाया जाता है, वह दीक्षाग्नि है. (१३)

EN English Translation

Calling guests is a joyous agni, feeding them in your home is the agni of garhapatya and the vessel in which food is cooked for the guest is deekshagni. (13)

卐 HinduText AI