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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 8 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 8 • मन्त्र 2

9.8.2

Mantra ID: 9.8.2

पय॑श्च॒ वा ए॒ष रसं॑ च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.8.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो अतिथियों से पहले भोजन करता है, वह अपने घरों के दूध और रस को नष्ट करता है. (२)

EN English Translation

The one who eats before the guests destroys the milk and juice of his houses. (2)

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