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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 8 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 8 • मन्त्र 5

9.8.5

Mantra ID: 9.8.5

की॒र्तिं च॒ वा ए॒ष यश॑श्च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑ ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.8.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो अतिथि से पूर्व भोजन करता है, वह अपने घरों की कीर्ति और यश को समाप्त करता है. (५)

EN English Translation

The one who eats before the guest ends the glory and fame of his houses. (5)

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