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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 123 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 123 • ऋचा / मन्त्र 13

1.123.13

Mantra ID: 1.123.13

ऋ॒तस्य॑ र॒श्मिम॑नु॒यच्छ॑माना भ॒द्रम्भ॑द्रं॒ क्रतु॑म॒स्मासु॑ धेहि । उषो॑ नो अ॒द्य सु॒हवा॒ व्यु॑च्छा॒स्मासु॒ रायो॑ म॒घव॑त्सु च स्युः ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.123.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे उषा! तुम सूर्य की किरणों के अनुकूल चलती हुई हमें ऐसी बुद्धि दो, जिससे हम यज्ञ आदि कर्मों के द्वारा अपना कल्याण कर सकें. हमारे द्वारा आहूत होकर तुम अंधकार का नाश करो. हविरूप धन से युक्त हम यजमानों के पास अनेक प्रकार की संपत्ति हो. (१३)

EN English Translation

Oh, Usha! You, according to the rays of the sun, give us such wisdom, so that we can do our welfare through the deeds of yajna etc. By being called by Us, you destroy the darkness. We hosts have many types of property with wealth. (13)

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