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1.140.9
अ॒धी॒वा॒सं परि॑ मा॒तू रि॒हन्नह॑ तुवि॒ग्रेभिः॒ सत्व॑भिर्याति॒ वि ज्रयः॑ । वयो॒ दध॑त्प॒द्वते॒ रेरि॑ह॒त्सदानु॒ श्येनी॑ सचते वर्त॒नीरह॑ ॥ (९)
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ऋग्वेद मन्त्र 1.140.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यह अग्नि धरती माता को वस्त्रों के समान ढकने वाली झाड़ियों को चारों ओर से चाटते हुए महान् शब्द करने वाले प्राणियों के साथ तेजी से भांति-भांति का गमन करते हैं. वह चरणों वाले अर्थात् मनुष्यों और पशुओं को खाने की वस्तुएं देते तथा तृणादि को जलाते हुए उस स्थान को काला कर देते हैं, जिससे चलकर आते हैं. (९)
EN English Translation
This fire moves rapidly with the creatures who make great words, licking the bushes that cover mother earth like clothes from all sides. He gives food items to the feet, that is, humans and animals, and blackens the place from which he walks, by burning the triendi. (9)