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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 167 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 167 • ऋचा / मन्त्र 11

1.167.11

Mantra ID: 1.167.11

ए॒ष वः॒ स्तोमो॑ मरुत इ॒यं गीर्मा॑न्दा॒र्यस्य॑ मा॒न्यस्य॑ का॒रोः । एषा या॑सीष्ट त॒न्वे॑ व॒यां वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.167.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! आदर के योग्य मांदर्य कवि का यह स्तुतिसमूह तुम्हारे लिए है. यह स्तुति इस अभिलाषा से तुम्हारे पास जाती है कि स्तुतिकर्ता का शरीर पुष्ट हो. हम भी इस स्तुति द्वारा अन्न, बल एवं दीर्घ आयु प्राप्त करें. (११)

EN English Translation

O Maruto! This group of praises of the worthy mandarya poet is for you. This praise goes to you with the desire that the body of the praiseor be strengthened. Let us also gain food, strength and long life through this praise. (11)

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