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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 27 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 8

1.27.8

Mantra ID: 1.27.8

नकि॑रस्य सहन्त्य पर्ये॒ता कय॑स्य चित् । वाजो॑ अस्ति श्र॒वाय्यः॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.27.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि देव! तुम शत्रुओं का दमन करने वाले हो. तुम्हारे भक्त यजमान पर कोई आक्रमण नहीं कर सकता, क्योंकि उसके पास विशेष प्रकार की शक्ति है. (८)

EN English Translation

O God of agni! You are going to oppress the enemies. Your devotee cannot attack the host, because he has a special kind of power. (8)

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