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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 42 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 10

1.42.10

Mantra ID: 1.42.10

न पू॒षणं॑ मेथामसि सू॒क्तैर॒भि गृ॑णीमसि । वसू॑नि द॒स्ममी॑महे ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.42.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम पूषा की निंदा नहीं करते, अपितु सूक्तों से उनकी स्तुति करते हैं. हम दर्शनीय पूषा से धन की याचना करते हैं. (१०)

EN English Translation

We do not condemn The Pusha, but praise Him with suktas. We ask for money from the visible god. (10)

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