Popular:
ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 45 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 3

1.45.3

Mantra ID: 1.45.3

प्रि॒य॒मे॒ध॒वद॑त्रि॒वज्जात॑वेदो विरूप॒वत् । अ॒ङ्गि॒र॒स्वन्म॑हिव्रत॒ प्रस्क॑ण्वस्य श्रुधी॒ हव॑म् ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 1.45.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अनेक कर्म करने वाले एवं सर्वज्ञ अग्नि! प्रियमेधा, अत्रि, विरूप और अंगिरा नामक ऋषियों के समान प्रस्कण्व की पुकार भी सुनो. (३)

EN English Translation

O many doers and omniscient agni! Listen to the call of the present like the sages named Priyamedha, Atri, Virup and Angira. (3)

卐 HinduText AI