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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 45 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 8

1.45.8

Mantra ID: 1.45.8

आ त्वा॒ विप्रा॑ अचुच्यवुः सु॒तसो॑मा अ॒भि प्रयः॑ । बृ॒हद्भा बिभ्र॑तो ह॒विरग्ने॒ मर्ता॑य दा॒शुषे॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.45.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! सोमरस निचोड़ने वाले बुद्धिमान्‌ ऋत्विज्‌ हव्यदाता यजमान के लिए तुम्हें अन्न के समीप बुलाते हैं. तुम महान्‌ एवं तेजस्वी हो. (८)

EN English Translation

O agni! The wise sages who squeeze the somras call you near the grain for the host. You are great and brilliant. (8)

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