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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 46 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 15

1.46.15

Mantra ID: 1.46.15

उ॒भा पि॑बतमश्विनो॒भा नः॒ शर्म॑ यच्छतम् । अ॒वि॒द्रि॒याभि॑रू॒तिभिः॑ ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.46.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों सोमरस पिओ. इसके पश्चात्‌ तुम अपनी प्रसिद्ध रक्षा द्वारा हमें सुखदान करो. (१५)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! You both drink somras. After this, you comfort us with your famous defense. (15)

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